[Intro]
बारिश ki बूँदें, थैले पे नगाड़े जैसे टप-टप
अगरविं, तू सुन, गाछाँ के पत्ते नम हैं अभी
[Verse 1]
अरे अरविन भाई, तू बता गाव में कितना पानी है,
आकाश से गिरे बूदों की गिनती, खेतों में कहां बची राय है?
हम जड़ों से पूछ लें, बरखा की कहानी सुनाते हैं,
मिट्टी की खुशबू में हर दुआ अभी भी जवान है।
[Pre-Chorus]
धरती माँ की आहें, पंछी गाने लगें,
कहीं दरिया बहें, कहीं बूँदें थम जाएँ।
[Chorus]
बरसा रे बरसा, खेतों में हरियाली लाये,
हमारे गाँव में स्वच्छ पानी, खेतों को ललचाये।
बरसा रे बरसा, आँखों में सपने सजाये,
अरविन भाई की मुस्कान, बरसात में फिर से आये।
[Verse 2]
कुदरते की इस मेहरबानी में हम सब साथी,
फाखल के पेड़ पे दो मोती-सी बूंदें गैलेँतीँ।
गाड़ी-गाँव की गूंज उठे, खुशी से सब ताल मिलाकर,
आगे बढ़ेंगे जब तक धरा की प्यास न समाप्त हो जाए।
[Pre-Chorus]
मिट्टी की खुशबू, नदियाँ साथ चलें,
फूलों की गलियों में बच्चों की हंसी फैलें।
[Chorus]
बरसा रे बरसा, हमारे खेत फिर से हरे,
गांव की राहों पर बच्चों के पाँव चमकते सरे।
बरसा रे बरसा, उम्मीदों की बूँदें बरसे,
अरविन भाई, तेरे रंग से दुनिया सुनहरे।
[Bridge]
अगर clouds loose नहीं होते, हम धैर्य का बाँस बाँधेंगे,
एक साथ मिलकर हर बूंद को नया जीवन बनाएँगे।
[Chorus]
बरसा रे बरसा, किसान की हथेली में दे नयी कहानी,
हमारी धरती, हमारी शान, तेरी बरसात से जवानी।
बरसा रे बरसा, हर तरफ खुशियाँ बहें,
अरविन भाई, गाव की आवाज़ बनकर गूंजें।
[Outro]
बूंदें लौटेंगी, कहेंगी हम तैयार हैं, फिर कभी रुकेंगे नहीं।