टूटा था जो सपना, फिर से सजाएंगे,
रात कितनी भी गहरी हो, सुबह तो लाएंगे।
आँखों में जो आँसू हैं, मोती बन जाएंगे,
हम गिरकर भी दुनिया में, फिर से मुस्कुराएंगे।
राहों में अँधेरा है, दिल में मगर उजाला,
हर दर्द ने सिखाया है, खुद को फिर संभालना।
जो साथ नहीं ठहरा, उसका क्या ग़म करना,
अपने ही हौसलों से, आगे कदम बढ़ाना।
टूटा था जो सपना, फिर से सजाएंगे,
रात कितनी भी गहरी हो, सुबह तो लाएंगे।
कल की वो अधूरी बातें, हवा में खो जाएँ,
नए सफ़र की राहें, फिर हमें बुलाएँ।
दिल अगर थक जाए, थोड़ा सा रुक जाना,
लेकिन कभी ना खुद से, तुम हार मान जाना।