[Intro]
जय जगन्नाथ, चरणों में है भक्तों की जय-जयकार
महिमा की गूँज में बंधे हैं भक्तों के विचार॥
[Verse 1]
नीलाचल के राज तुम्हारे नाम की ध्वनि है सदा,
दया के सागर से तरते हर एक हृदय की ध्वनि है भरा।
रथ पर जग को तारते तुम, रथ की गूँज बनती जयकार,
भक्ति में खोये मार्ग दिखाओ तुम, हर दिन हो संकल्पuहार॥
[Pre-Chorus]
प्रेम की माला बनकर तुम हर दिल में बसी रहो,
धैर्य की धारा से जीवन का संगीत पनपाओ॥
[Chorus]
जय जगन्नाथ, नमस्कार तुम्हारे चरणों में,
भक्ति की यह रौशनी सदा 우리의 पथप्रदर्शक बन जाओ।
नाम सुमिरण से सजती है सुबह-शाम की राह,
भक्तों के मुख पर लाये तुम्हारा आशीर्वाद जीवन-संझा।
[Verse 2]
दया के समुद्र में नहाते हैं संत-संततियां,
हर दिन तुम्हारा नाम दिल में बसा रहे भक्तिनों की रतियां।
राह दिखाओ तुम भक्तों को अंधेरों में उजाला देकर,
सुख-दुख में भी बने रहो साथ, दिल से दिल जोड़े जाते।
[Pre-Chorus]
दिल की हर इक धड़कन में तुम बसी जय-जयकार,
नीलाचल की शान से भक्तों का समर्थ उत्तराधार॥
[Chorus]
जय जगन्नाथ, नमस्कार तुम्हारे चरणों में,
भक्ति की यह रौशनी सदा 우리의 पथप्रदर्शक बन जाओ।
नाम सुमिरण से सजती है सुबह-शाम की राह,
भक्तों के मार्ग-दर्शक बन कर तुम हो जीवंत आस।
[Bridge]
हृदय के अश्रुओं से भीगा एक मंत्रोच्चार है,
गुण-गान में तेरा नाम हर बात के पथ के पार है।
रथ-यात्रा में पूर्णता है जगन्नाथ हमारा साथ,
बंधु-ब्रïnध नूर-सा जारी है यह आराधना Relay।
[Chorus]
जय जगन्नाथ, नमस्कार तुम्हारे चरणों में,
भक्ति की यह रौशनी सदा 우리의 पथप्रदर्शक बन जाओ।
नाम सुमिरण से सजती है सुबह-शाम की राह,
भक्तों के मार्ग-दर्शक बनने वाला तुम ही प्रधान कारण।
[Outro]
जय जगन्नाथ, हर दिन दिल में बसा रहो,
भक्ति-यात्रा में तुम्हारा नाम ही जीवन का ठाठ हो।