सपनों की कश्ती, उम्मीदों का पानी,
दिल में है धुन कोई, आँखों में कहानी।
लहरों से कह दो, हम रुकने वाले नहीं,
अपनी ही मस्ती में, झुकने वाले नहीं!
चल पड़े, चल पड़े,
ख्वाबों की राहों पे,
हँस पड़े, हँस पड़े,
अपनी ही चाहों पे!
सपनों की कश्ती रे,
मस्ती में बहती रे,
आज नहीं तो कल सही,
मंज़िल भी मिलती रे!
ओ हो… दिल ये कहता है,
कुछ भी तो मुश्किल नहीं,
अपने इरादों के आगे,
दुनिया भी मुश्किल नहीं!
जेबों में थोड़े से सपने,
हाथों में सूरज रख लें,
कल की फ़िक्र छोड़कर हम,
आज को खुलकर जी लें।
हवा बोले—“चल ना पगले!”
रास्ते बोले—“आ जा!”
दिल बोले—“जो सपना देखा,
उसको सच कर जा!”
चल पड़े, चल पड़े,
धूप को ओढ़े हुए,
गुनगुना, गुनगुना,
रास्ते जोड़े हुए!
सपनों की कश्ती रे,
मस्ती में बहती रे,
लहरों की ताल पे,
ज़िंदगी नाचती रे!
ओ हो… दिल ये कहता है,
हिम्मत को थामे रह,
गिरकर भी हँस देना,
बस आगे बढ़ते रह!
ना कोई डर, ना कोई शिकवा,
ना कोई रुकने का बहाना,
आज अगर है छोटा कदम तो,
कल होगा अपना ज़माना!
ओ… सपनों की कश्ती,
उम्मीदों की धुन,
दिल में हो जुनून तो,
जीतेंगे हम हर गुन!
चल पड़े, चल पड़े…
ख्वाबों की राहों पे,
हँस पड़े, हँस पड़े…
अपनी ही चाहों पे!
सपनों की कश्ती रे…
मस्ती में बहती रे…
जहाँ दिल ले जाए हमें,
वहीं हमारी मंज़िल रे! 🌊✨