[Intro]
अरे आन और शान की खातिर, सर अड़ते दिखेंगे,
इतिहास गवाह है, देख ले धी-मान रण में लड़ते दिखेंगे।
ना बदमाशी करी कदे, बस खून बहाया जाती पे,
ना पीठ दिखाई रणभूमि में, तीर चढ़ाया छाती पे।
[Verse 1]
कला थी विश्वकर्मा काज में,
धी-मान की शान है, हर एक अंदाज़ में।
धी-मान जाती, बिगड़ा अंदर में,
काष्ठ का कामो, दुनिया में कलाकार...
एक वीर होया था, उस महाभारत वाले रण में,
हे विश्वकर्मा भगवान, गुरु जिसके पूरे कण-कण में।
पूरे रण पे भारी, ना वो मारा जाता,
पल्ले का में किसी के आया नहीं वो, मरते-मरते चलते।
[Chorus]
नीव हिलने की सोची तो, पड़ जाऊंगा संगत रे,
शहर के डाकू, सबरे बैठे से भरी संगत में।
चौड़ी छाती धी-मान जाती, शेर बिगड़ा अंदर मेरे,
काष्ठ का कामो, दुनिया में कलाकार...
[Verse 2]
सबसे बड़ा था रावण, जिसने करा घमासान बड़ा,
भक्ति के बस की बात नहीं, उसने आगे भगवान लड़ा।
अशोक था राजा, जिसके राज्य में बुद्धि धी-मान की,
जब क्रोध में आया विश्वकर्मा, हिम्मत किस में थी की!
हरियाण धी-मान, ना रे कदम के रे धी-मान,
तेरी कलम ने देख बवंडर रे।
[Outro]
छाती धी-मान जाती, शेर अंदर,
अरे मेरे काष्ठ का काम भरा,
यो डरे है दुनिया धी-मान से रे, दुनिया धी-मान से...