मुखड़ा
तेरी हँसी में सुबह का उजाला मिले,
तेरी नज़र से मुझे हर किनारा मिले।
जब भी तू पास हो, दिल ये कहे बार-बार,
तेरे बिना अब कहीं ना गुज़ारा मिले।
अंतरा 1
चाँदनी रातों में तेरा ही नाम लिखूँ,
भीगी हवाओं में अपना पैग़ाम लिखूँ।
सपनों की राहों में तू हमसफ़र बन जाए,
दिल की किताबों में तेरा मुकाम लिखूँ।
मुखड़ा
तेरी हँसी में सुबह का उजाला मिले,
तेरी नज़र से मुझे हर किनारा मिले।
जब भी तू पास हो, दिल ये कहे बार-बार,
तेरे बिना अब कहीं ना गुज़ारा मिले।
अंतरा 2
धीरे-धीरे धड़कन कोई गीत गुनगुनाए,
तेरे मेरे प्यार की कहानी दोहराए।
साथ तेरा मिल जाए तो दुनिया हसीन लगे,
हर एक मौसम मुझे तेरा चेहरा दिखाए।
ब्रिज
तू है दुआ मेरी, तू ही अरमान है,
तेरे बिना ये दिल कितना वीरान है।
आ जा कि ज़िंदगी में रंग फिर से भर जाएँ,
तू ही मेरी मंज़िल, तू ही पहचान है।
मुखड़ा (समापन)
तेरी हँसी में सुबह का उजाला मिले,
तेरी नज़र से मुझे हर किनारा मिले।
जब भी तू पास हो, दिल ये कहे बार-बार,
तेरे बिना अब कहीं ना गुज़ारा मिले। 🎶❤️