शहर में हवा भी डेटा बन जाती है,
साँस लेता हूँ—जैसे सर्वर में लॉग-इन हो जाती है।
हथेली में क़ैद है आसमान का नीला रंग,
स्क्रीन पर स्क्रीन बँट जाता है हर एक संग।
दर्शन पूछे—“मैं कौन हूँ?” विज्ञान बोले—“क्यों?”
शहर कहे—“ज़िंदा रहना है तो तेज़ बनो, यूँ।”
दर्शन पूछे—“मैं कौन हूँ?” विज्ञान बोले—“क्यों?”
शहर कहे—“ज़िंदा रहना है तो तेज़ बनो, यूँ।”
रोशनी नापते हैं लक्स में, प्यार लाइक में,
दिल चलता है कोड पर, गलती पकड़ी जाए स्ट्राइक में।
वक़्त यहाँ अपडेट है, यादें बस कैश,
मौत एक नोटिफिकेशन—रिश्ते हो जाते हैं क्रैश।
क्या मैं सिर्फ़ न्यूरॉन्स की ग़लत गिनती हूँ,
या ब्रह्मांड की जागती सवालों की किताब हूँ?
बिग बैंग की गूँज अब भी कानों में बजती है,
क्या इसी वजह से तन्हाई इतनी गहरी लगती है?
रात मतलब नीली रौशनी, मेलाटोनिन क़त्ल,
ख़्वाब आते हैं क्लाउड से—डाउनलोड होता नस्लों का बीज।
अगर आत्मा है, तो उसकी फ़्रीक्वेंसी क्या?
प्यार कण है या लहर—ये पहेली है क्या?
जब तुम पास आते हो, स्पेस-टाइम झुक जाता है,
मेरे सारे फ़ॉर्मूले वहीं टूट जाता है।
क्या मैं सिर्फ़ न्यूरॉन्स की ग़लत गिनती हूँ,
या ब्रह्मांड की जागती सवालों की किताब हूँ?
एक पल में सारे हिसाब झूठे पड़ जाते हैं,
जब तुम कहते हो—“मैं हूँ, मगर एक शर्त के साथ।”
इस शहर में इंसानों से ज़्यादा सिग्नल हैं,
इसलिए तुम्हारा प्यार नहीं—क़िस्मत की तलाश है।
इस शहर में हवा भी डेटा बन जाती है,
साँस लेता हूँ—जैसे सर्वर में लॉग-इन हो जाती है।
हथेली में क़ैद है आसमान का नीला रंग,
स्क्रीन पर स्क्रीन बँट जाता है हर एक संग।
दर्शन पूछे—“मैं कौन हूँ?” विज्ञान बोले—“क्यों?”
शहर कहे—“ज़िंदा रहना है तो तेज़ बनो, यूँ।”