[Intro]
महिला: बागमती की धारा गाये, मिट्टी अपनी महक उठाए, रौतहट की प्यारी धरती, सबको गले लगाना सिखाए।
पुरुष: मंदिर की घंटी बजे यहाँ, मस्जिद से अज़ान भी आए, गुरुद्वारे की वाणी गूँजे, हर दिल में प्रेम समाए।
[Verse 1]
पुरुष:
राम का संदेश करुणा का,
रहीम का पाठ दया का,
नानक की वाणी सेवा की,
ईसा का मार्ग क्षमा का。
महिला:
बुद्ध ने शांति का दीप जलाया,
महावीर ने प्रेम सिखाया,
हर धर्म ने बस एक ही कहा,
मन में बैर न लाया。
दोनों:
राहें चाहे जुदा-जुदा हों,
मंज़िल सबकी एक है,
रौतहट की इस धरती पर,
हर दिल में प्रेम नेक है。
[Chorus]
हम सब एक हैं, हम सब साथ हैं,
यही हमारी पहचान है;
रौतहट की धरती पर भाईचारा है,
भाईचारा ही सम्मान है。
[Verse 2]
महिला:
जब-जब नफ़रत ने सिसकते दिलों को घेरा,
dil डर गया, आवाज़ रुकी सी रही,
पर एकता की धारा फिर से बह चली,
रौतहट की धरती ने प्रेम की गाँठ खोली。
पुरुष:
हम सब एक साथ खड़े रहे,
भेदभाव के हर निशान मिटे,
आत्मीयता की रोशनी फैली,
हर हाथ में हाथ हमारा साथ दे。
[Chorus]
हम सब एक हैं, हम सब साथ हैं,
यही हमारी पहचान है;
रौतहट की धरती पर भाईचारा है,
भाईचारा ही सम्मान है。
[Bridge]
हर धर्म की राह में प्यार का संदेश है,
दया, सम्मान और समझ है,
अगर दिल खुलेंगे, हर दूरी मिटेगी,
रौतहट की एकता सदा बढ़ेगी。
[Chorus]
हम सब एक हैं, हम सब साथ हैं,
यही हमारी पहचान है;
रौतहट की धरती पर भाईचारा है,
भाईचारा ही सम्मान है。
[Outro]
ना हार मानिए, दिल से बोलिए प्यार,
रौतहट की कहानी रहे उज्जवल हर बार।