[Intro]
शहर की चुप रात
[Verse 1]
शहर कहता है सब अकेले, फिर भी दिल तुझे खोजे,
रात की ठंडी हवा में तेरी यादों की भाषा बोले।
नीयन बत्तियाँ रंग लें, तेरी हँसी का मोती दिखे,
इस भीड़-भरे शहर में तू ही मेरा साथ बने।
[Chorus]
तू कहाँ है अभी, क्या लौटेगी तू फिर किसी रात?
तेरी हँसी की रोशनी से फिर जगें ये साथ।
[Verse 2]
नदी किनारे बैठा मैं, शहर की रोशनी के नीचे सोचूं,
पानी की धार पर पड़े प्रकाश में तेरा चेहरा को मैं देखूं।
फ्लाईओवर के नीचे धीमी बारिश तेरे नाम की दुआ बोले,
क्या तू लौट आओगी, इस दिल की उम्मीद फिर से जोड़े।
[Chorus]
तू कहाँ है अभी, क्या लौटेगी तू फिर किसी रात?
तेरी हँसी की रोशनी से फिर जगें ये साथ।
[Outro]
फिर किसी सुबह नए गीत के साथ मिलेंगे हम।