[Verse 1]
नौ साल का आयान, रमज़ान की तैयारी देख रहा
अम्मी की रसोई से पकवानों की खुशबू हवा में बिखर गई
अब्बू रोज़ मस्ज़िद जाते, इबादत का सुकून लाते
सेहरी की रोशनी में उसने ठान लिया, आज मैं भी रोज़ा रखूँगा
सेहरी में पराठा खाया, दही लिया और खूब पानी पिया
फजर की नमाज़ के बाद दिल में एक अनोखी खुशी जगी
[Chorus]
रोज़े का जोश दिल में है, सुबह से शाम तक
धैर्य से जीना सीख, गर्मी में भी मुस्कान रख
जो मिले उसे बाँट दूँ, ईमान की लौ जलाये
यह रमज़ान है आयान की दास्तान
[Verse 2]
दोपहर हुई, गर्मी बढ़ी, प्यास लगने लगी
टीवी पर खाने-पीने के विज्ञापन, हर चैनल आँखों को ललचाते
खिड़की के पास एक छोटा बच्चा थका-सा पसीना पोंछ रहा
आयान की आँखों में तरस उभरा, उसने सोचा—मैं क्या करूँगा
अगर मैं रोज़ा रखूँ, तो कल पानी बाँट दूँगा—यही सोच उसका ताबेदार
[Chorus]
रोज़े का जोश दिल में है, सुबह से शाम तक
धैर्य से जीना सीख, गर्मी में भी मुस्कान रख
जो मिले उसे बाँट दूँ, ईमान की लौ जलाये
यह रमज़ान है आयान की दास्तान
[Bridge]
दिल से निकली दुआ, करुणा के गीत
माँ ने सिखाई है प्रेम सबसे बड़ी इबादत
रौशनी भर दूँ राहों में, दिल से देना है साथ
[Chorus]
रोज़े का जोश दिल में है, सुबह से शाम तक
धैर्य से जीना सीख, गर्मी में भी मुस्कान रख
जो मिले उसे बाँट दूँ, ईमान की लौ जलाये
यह रमज़ान है आयान की दास्तान
[Outro]
सूरज ढला तो आयान मुस्कुराया, दिल में नई उम्मीद जगी
कल रोज़ा फिर से, और दया की कहानी आगे बढ़ेगी