[Intro]
धनुष की तीरों में भी, धड़कन की आवाज़ है
अर्जुन का मन डगमगत, पर कृष्ण का ज्ञान बााज़ है
[Verse 1]
युद्ध की हवा में сомнение का सन्नाटा है
धर्म क्या, कैसे लड़ूं—मन जो समझाए, वही संकल्प है
कृष्ण बोले कर्म करो फल की चिंता छोड़कर
धरो शांति की तलवार, दिल में एक आशा जड़कर
[Pre-Chorus]
तुम भीतर की आवाज़ सुनो, वीर वही उठेगा जो सच बोले
कर्म की राह आसान नहीं, पर मार्ग वही खुलेंगे जो तुम चुनो
[Chorus]
करो कर्म, और बढ़ते चलो, धर्म की रोशनी साथ पलों में
जो समता से लड़े, वही जीत है, यही जीवन के गीतों में
दिल की धड़कन कहे: अभी नहीं ठहरना, आगे बढ़ना है
युद्ध के दिमाग़ में शांति, और हाथों में कर्म का गहरा घेरा है
[Verse 2]
कृष्ण ने कहा—युद्ध नहीं है निवृत्त, पर संकल्प है पक्का
कर्मयोग से जीत मिलती है, शत्रु नहीं, भय कमба
धर्म की राह में दुविधा आए, पर चेतना आँखों में बसी
जो उद्धार की राह दिखाए, वही गुरु, वही दिशा
[Pre-Chorus]
तुम भीतर की आवाज़ सुनो, वीर वही उठेगा जो सच बोले
कर्म की राह आसान नहीं, पर मार्ग वही खुलेंगे जो तुम चुनो
[Chorus]
करो कर्म, और बढ़ते चलो, धर्म की रोशनी साथ पलों में
जो समता से लड़े, वही जीत है, यही जीवन के गीतों में
दिल की धड़कन कहे: अभी नहीं ठहरना, आगे बढ़ना है
युद्ध के दिमाग़ में शांति, और हाथों में कर्म का गहरा घेरा है
[Bridge]
कृष्ण की बानी कहती है: विश्वास बनाओ, धैर्य से बढ़ो
कभी द्वेष न बनायंे अपना साथी, कर्म से ही खुद को पाओ
[Outro]
जब जय की बत्ती जले, तब समझो सच्चा धर्म क्या है
कर्म के रास्ते पर चलो—यही महाभारत की सीख है