[Intro]
तुम्हारे लिए दिल मेरा धीरे-धीरे उधार नहीं बनता
कहना चाहा भी बहुत, पर जुबान थमती रही
[Verse 1]
इस साल सीखा मैं सच में, कैसे किसी को बहुत देना, फिर भी खोना
जो नहीं लौटाते, उनके दायरे से खुद को दूर करना
ओह कल्कि, ओह कल्कि, आँखों में है कठिनाईयों का सूनापन
पर हर धड़कन कहती, अब तेरे लिए नहीं घुलना
[Chorus]
दिल का जलवा कम नहीं, पर बंधन टूटे तो छूटना नहीं
जो नहीं समझे, उनसे बीचोंबीच खुद को रोकना नहीं
कल्कि की आवाज़ भी हो, पर दूरी बनाए रखना ज़रूरी
सीखा कि खुद के लिए प्रेम, बाकी सब से पहले सच है सच्चाई
[Verse 2]
कम नहीं दया, पर दया चाहिए तो सही वक्त पर
सीखे हमने दूरी रखना, और उधार दिल छोड़ना नहीं
जो लौट आएं सही वक्त पर, उन्हें फिर से सम्हाल लेना
जो गये, उन्हें खाली नहीं छोड़ना, बस आगे बढ़ जाना
[Chorus]
दिल का जलवा कम नहीं, पर बंधन टूटे तो छूटना नहीं
जो नहीं समझे, उनसे बीचोंबीच खुद को रोकना नहीं
कल्कि की आवाज़ भी हो, पर दूरी बनाए रखना ज़रूरी
सीखा कि खुद के लिए प्रेम, बाकी सब से पहले सच है सच्चाई
[Bridge]
आत्म-स्वीकृति की रोशनी में, वह कदम ठहरता नहीं
जो लोग साथ दें, वही राह बनाते हैं सही
[Chorus]
दिल का जलवा कम नहीं, पर बंधन टूटे तो छूटना नहीं
जो नहीं समझे, उनसे बीचोंबीच खुद को रोकना नहीं
कल्कि की आवाज़ भी हो, पर दूरी बनाए रखना ज़रूरी
सीखा कि खुद के लिए प्रेम, बाकी सब से पहले सच है सच्चाई
[Outro]
इस साल का सबसे बड़ा पाठ, खुद की कीमत समझना है
ओह कल्कि, अब आवाज़ खुद से मिलती है, फिर से शुरू होता है चलना