[Intro]
नीला आकाश, गूंजती जलतरंगें, चिर परिचित कहानी
[Verse 1]
नीली परी आई एक शाम, पंख बादलों से नर्म, पन्नों जैसी रोशनी
रोहन की आँखों में आंसू थे, सूखे खेतों की धज्जियाँ हकीकत बनती
वहीं से उसकी दुआ बनी, एक वादे की पहली पगधुरी
[Pre-Chorus]
“मैं लाऊँगी पानी का निशान, धरती की धड़कनों से सुनकर, फैलाऊँगी एक नया बरसात का रंग”
[Chorus]
नीली परी कहती, “रोहन, डर मत, आओ तुम साथ चलो
नीचे से ऊपर तक, नदियाँ बनें-झीलें बनें-समुद्र भी बहें
खुल जाएँगे कुएँ, हर गली में प्यास बुझेगी तुम साथ”
[Verse 2]
पत्तों की रेखाओं सा रौशन दृश्य, पंखों की रोशनी जैसे सवेरे
नीली डोर से जुड़कर, परियों ने धरती का सपना संभाला ये बहते श्वास
रोहन ने होंठों पे उम्मीद थामी, बूंदें बनकर गिरने को तड़पे वह
[Pre-Chorus]
“एक दुआ नहीं, यह क्रम है, हर फिर पानी का चक्र फिर से लौटेगा”
[Chorus]
नीली परी कहती, “रोहन, डर मत, आओ तुम साथ चलो
नीचे से ऊपर तक, नदियाँ बनें-झीलें बनें-समुद्र भी बहें
खुल जाएँगे कुएँ, हर गली में प्यास बुझेगी तुम साथ”
[Bridge]
धरा मुस्काई, बादलों ने गूँज सुनी
पानी की धारा ने पलकें उठाकर देखा
नीली परी की सहायता से गाँव मुस्काया, फिर जीवन लौट आया
[Chorus]
नीली परी कहती, “रोहन, अब देखो, बारिश की ये सरगम
बूंदे बनकर हर ज़िंदगी को दें उम्मीद की आवाज़ें
हम साथ हैं तो हर खेत में हर नदी में जीवन है”
[Outro]
आकाश ने नीचे झुककर आशीर्वाद दिया, पानी बिखरा आस-पास
नीली परी की कहानी अभी खत्म नहीं, हर पानी में एक नया-पनहरा गीत बचा है