[Intro]
ओ ठंडी सुबह, गाँव की धुन में
रामु दादा की कहानी की जुगलबंदी
[Verse 1]
बुजुर्ग आँखों में चमक, बालों में बारीक धूसर रंग
छड़ी थामे चलते हैं, गाँव के रास्ते संग
बच्चे इकट्ठे होते, चेहरे पे उम्मीद की ಬೆಳक
वे कहते हैं: बचपन की नाविक दुनिया अभी बाकी है बक़ी
[Chorus]
यही तो है कहानी, ख्वाबों का किनारा
जहाँ सागर से मिली यादें, गांव की मुस्कान सहारा
हर ताजा सुबह, नई राह दिखाती है
रामु दादा सुनाते, बच्चे सपने बनाती है
[Verse 2]
उन्होंने बताई बचपन की नावें, दूर-दूर देशों के पते
लहरों की भाषा समझते थे, बिना कलम-कलम के फेते
छोटे कदमों से बच्चों ने सीखा, जमीं पर चलना कैसे
कि सच भी एक यात्रा है, चाह हो तो सरकती है धरा
[Pre-Chorus]
छड़ी टनटनाती है, हर कहानी में आवाज़ उठे
दिल की दीवारें खुलें, नया सूरज पीछे ना रूके
[Chorus]
यही तो है कहानी, ख्वाबों का किनारा
जहाँ सागर से मिली यादें, गांव की मुस्कान सहारा
हर ताजा सुबह, नई राह दिखाती है
रामु दादा सुनाते, बच्चे सपने बनाती है
[Bridge]
गाँव की पगडंडियाँ, footprints बन जाएँ
जोश भरे किस्से, हर चेहरे पर छाएँ
[Chorus]
यही तो है कहानी, ख्वाबों का किनारा
जहाँ सागर से मिली यादें, गांव की मुस्कान सहारा
हर ताजा सुबह, नई राह दिखाती है
रामु दादा सुनाते, बच्चे सपने बनाती है
[Outro]
और जब रात हो जाए, चाँद पास लाता है कहानी
रामु दादा की आवाज़, बच्चों में रहती जवानी