[Intro]
धुआँ उड़े नहीं, पसीना चढ़े पहरेदारों पर
ख़ुद से बड़ी ताक़त दिखी, ईमान की आवाज़ सार्थक
[Verse 1]
एक गरीब लकड़हारा दिन भर मेहनत करे,
काटे पेड़ों की शाखें, पसीने की धार अपनाए,
किनारों पर आई नदी में टकराई कुल्हाड़ी,
फिसलकर गिरी, एक क्षण की दुखती कहानी।
[Pre-Chorus]
सोने-चाँदी की चमकें दिखी जब उसूल से डरे नहीं,
दिल ने कहा, सच्चा रास्ता वही जो ले जाए भीतर तक।
[Chorus]
इमान में है ताक़त, सच की जीत दिलाए,
लालच की रेत से पथ भटकाए नहीं, डगमगाए नहीं,
जो मेहनत से पाया उसे ही स्पर्श करे दामन,
सादगी की कुंजी खुलवाए मांझी का ठहराव फिर से।
[Verse 2]
मुश्किल समय आया, ताव न दिखा उसने,
नदी की धारा साफ-साफ राह दिखाती रही,
उसने कांटे नहीं चुने, साहस को अपनाया,
ईमान की रोशनी में समृद्धि बाद में आई।
[Pre-Chorus]
क्योंकि लालच भरे लोभ से दूर था दिल का रास्ता,
क-सच के पथ पर चलना ही सबसे पाक सत्य रहा।
[Chorus]
इमान में है ताक़त, सच की जीत दिलाए,
लालच की रेत से पथ भटकाए नहीं, डगमगाए नहीं,
जो मेहनत से पाया उसे ही स्पर्श करे दामन,
सादगी की कुंजी खोल दे फिर से नया आसमान।
[Bridge]
नीचे से ऊपर उठे हर कदम से यही बात पुकारे,
परिश्रम की धूप में सीखा है हार-जीत का मोल, ठहरना।
[Chorus]
इमान में है ताक़त, सच की जीत दिलाए,
लालच की रेत से पथ भटकाए नहीं, डगमगाए नहीं,
जो मेहनत से पाया उसे ही स्पर्श करे दामन,
सादगी की कुंजी बन जाएगी स्वर्णिम निशानी।
[Outro]
कहानी यही कहती है—ईमान से जीना लाभ देता, आगे बढ़ना सच्चाई के साथ।