[Intro]
धुंधली गली, अँधेरे में कदम
नीचे की तलछट पर फुसफुसाते राज़
[Verse 1]
मैं चल रहा हूँ स्मृतियों के पन्नों तक
प्राचीन कला की फटी चप्पल गूंजे रात
सूखी लेंस में चेहरे पलटते, संकेत दिखें दूरी पर
नींबू-जैसी ठंडी रोशनी में रहस्य बाते जड़ें
[Pre-Chorus]
क्यों ये तस्वीरें सांस लेतीं, क्यों मेरी पकड़ ढीली है?
हर मोड़ पर एक आँख है जो मुझे देखती है
[Chorus]
कला जाग उठी, मेरा रहस्य बन गया है कहानी
मैं खोज रहा था उसे, उसने मुझे चुन लिया आज
मैं घायल जासूस हूँ, तस्वीरें मुझे खींचें पन्नों में
चलना मुश्किल, पर फॉरेंसिक हवा भी सुनती है बनावट
[Verse 2]
कुशन-सी ठंडी मुस्कान, फ्रेम की दीवारों से निकल कर
कलाकृति कहे: ठहरो, अब तुम नहीं बचोगे
मेरी ही स्याही में वह जीवित हो उठी, मेरी परछाईं बन गई
मैं जो डर से भागूँ, वह मुझे ही पकड़ लेती है
[Pre-Chorus]
तस्वीरें क्यों डोलती हैं, क्यों अदालत में सवाल खड़े हैं?
हर पल एक सुरक्षा-चिट्ठी टूटती है
[Chorus]
कला जाग उठी, मेरा रहस्य बन गया है कहानी
मैं खोज रहा था उसे, उसने मुझे चुन लिया आज
मैं घायल जासूस हूँ, तस्वीरें मुझे खींचें पन्नों में
चलना मुश्किल, पर फॉरेंसिक हवा भी सुनती है बनावट
[Bridge]
अब जो बचा हूँ मैं, वही रहस्य है जवाब
कलाकृति की आँखों में एक दुनिया—अधूरा सच
मैं निर्णय नहीं कर पाऊँ, क्योंकि मैं भी एक प्राणी हूँ
[Chorus]
कला जाग उठी, मेरा रहस्य बन गया है कहानी
मैं खोज रहा था उसे, उसने मुझे चुन लिया आज
मैं घायल जासूस हूँ, तस्वीरें मुझे खींचें पन्नों में
चलना मुश्किल, पर फॉरेंसिक हवा भी सुनती है बनावट
[Outro]
फिर से अंधेरा, पर कहानी जीवित रहती है
कलाकृति की सांसों से मैं फिर एक पन्ना बन जाता हूँ