[Intro]
धरोहर सी रात आई, चंद्रमा ने गीत सुनाई
पथ एक नए शब्द में खुला, बाहों में धरा की आहट लेहाई
[Verse 1]
श्री महादेव की पवित्र भूमि की ओर, दिल में एक आस्था safeguarded
गंगा की धारा जैसी पवित्रता, पर्वतों की चोटी पर उमगती चाह है
पेड़-पुष्प हैं साक्षी, बजते हैं बयाबां में शंख, फूलों की गूंज में ज्ञान है
सार-हित की प्रार्थना साथ है, हर कदम पर भक्ती की लय है
[Chorus]
हर मंजिल पर जप हूँ, हर राह पर नम हूँ
प्रकृति की बौछार में दिव्यता का संग हूँ
आशीष से भर दूँगा ये अनुभव, स्मृति में आकार दूँगा
महादेव के चरणों में जीवन की धारा बहाऊँगा
[Verse 2]
ग्रहण की रात में तारों की पंक्तियाँ, मंदिर की घंटी जैसी पवित्र ध्वनि
बादलों के पीछे सूर्य की पहली किरण, मन में भक्ती से प्रफुल्लित है
नदियाँ गातीं, पर्वत whisper करते, अन्नपूर्णा की कृपा यथार्थ बनती
मैं प्रकृति के स्पर्श से खुद को हर-हर पवित्र पाता
[Chorus]
हर मंजिल पर जप हूँ, हर राह पर नम हूँ
प्रकृति की बौछार में दिव्यता का संग हूँ
आशीष से भर दूँगा ये अनुभव, स्मृति में आकार दूँगा
महादेव के चरणों में जीवन की धारा बहाऊँगा
[Bridge]
मन की दहलीज़ पर श्रद्धा के दीप जला कर चलना
नदियों के कोक में आरती-सी ध्वनि गुनगुनाते रहना
[Chorus]
हर मंजिल पर जप हूँ, हर राह पर नम हूँ
प्रकृति की बौछार में दिव्यता का संग हूँ
आशीष से भर दूँगा ये अनुभव, स्मृति में आकार दूँगा
महादेव के चरणों में जीवन की धारा बहाऊँगा
[Outro]
यात्रा पूरी होती नहीं, बस गहराती जाती है
भक्ति की ध्वनि से जीवन और धरती जुड़ती जाती है
]