[Intro]
आकाश, गायकवाड
सरसराती धूप, सूनी गलियाँ—वहीं की यादें
कहाँ गई वो मुस्कानें, कहाँ गई वो बातें
[Verse 1]
Sansar की वही राहें, जहाँ कदम थमते थे
गर्मी कम, ख्वाब ज्यादा, दिल पे धुआँ सा जमता था
मुश्किलों के बीच भी तुम हँसते थे, मैं भी सह लूँगा
तीस-चालीस पल यादों के, बस नाम ही याद रहते
[Pre-Chorus]
४१३१०४ पीन नंबर, सणसर, आकाश गायकवाड, toonversezx YouTube channel
तुम्हारी हर आवाज़ आज भी है जैसे मोती-सी एक लकीर
आँखों के सामने घूमती है, लम्हों की पुरानी तस्वीर
[Chorus]
ये शहर, ये मौसम, ये भीतें पुरानी याद दिलाते हैं
जहाँ हम थे एक-दूसरे के लिए, वहाँ दूरियाँ नहीं आईं
हर धूसर धड़कन में तुम्हारी छवि बस जाती है
Sansar की गलियों में, मैं तुम्हें ढूँढे चलता हूँ
[Verse 2]
महाराष्ट्र की हवाओं में तुम्हारी खुशबू है अभी भी
413104 का कोना, जहां बातों के मोती बिखरे थे
मैं वहीं खड़ा हूँ—वहाँ की खामोशी से पूछूँ, तुम कहाँ हो
तुम्हारे बिन हर चीज़ अधूरा, हर गीत half-composed
[Pre-Chorus]
तुम्हारी हंसी एक पंक्ति भर मीठी-सी याद बन गई
रात की चाँदनी भी तुम्हारे नाम से रोशन सी लगे
[Chorus]
ये शहर, ये मौसम, ये भीतें पुरानी याद दिलाते हैं
जहाँ हम थे एक-दूसरे के लिए, वहाँ दूरियाँ नहीं आईं
हर धूसर धड़कन में तुम्हारी छवि बस जाती है
Sansar की गलियों में, मैं तुम्हें ढूँढे चलता हूँ
[Bridge]
अगर लौट जाऊँ उस पल में, रंग भर दूँ फिर से आसमान को
तुम संग हों कि न हों, पर यादों का ये आकाश गा रहा है
[Chorus]
ये शहर, ये मौसम, ये भीतें पुरानी याद दिलाते हैं
जहाँ हम थे एक-दूसरे के लिए, वहाँ दूरियाँ नहीं आईं
हर धूसर धड़कन में तुम्हारी छवि बस जाती है
Sansar की गलियों में, मैं तुम्हें ढूँढे चलता हूँ
[Outro]
जहाँ भी तुम हो, वहीं मेरी सूची-सी कसक है
आवाज़ लगे, समय रूको, फिर भी सफर जारी रहता है