[Intro]
शहनाइयों की ठंडी धुन
[Verse 1]
चंचल साली इशारों में चिढ़ाती दूल्हे को
हंसी की फुलझड़ियाँ बनते कदमों से खेलतीं
[Chorus]
दिल्ली का लड्डू, मीठा है मगर मसाला
खिलाओ तो हंसी, पछतावा साथ न आये
रिश्तों की मिठास, साथ बढ़ाए
[Verse 2]
दुल्हन की माँ लड्डू बनाती चिंता में डोले
सोचती, शादी है दिल्ली का लड्डू, पछताएंगे दोनों
[Chorus]
दिल्ली का लड्डू, मीठा है मगर मसाला
खिलाओ तो हंसी, पछतावा साथ न आये
रिश्तों की मिठास, साथ बढ़ाए
[Outro]
शादी की हंसी, दिल से दिल तक जाए