माया के शहर में हम दो राहगीर,
मोहब्बत चलती है नियमों के उलट धीर।
हाथ न छूकर भी, सीना सीने को जाने,
आँखों की भाषा में लिखे अनकहे फसाने।
नोटिफ़िकेशन की भीड़ में ढूँढूँ तेरा नाम,
इमोजी के पर्दे में छुपा रहता है इल्ज़ाम।
कॉफ़ी शॉप की शीशे पे शाम का रंग,
हमारी कहानी का था कुछ अलग ही ढंग।
फ्लाईओवर के नीचे जामों की लंबी साँस,
साथ तू, मैं और थोड़ा-सा खुला आकाश।
बारिश भीगी रिक्शा की नीली प्लास्टिक में,
तेरी आवाज़ सो जाए मेरी थकी छाती में।
हेडफ़ोन में बजता अधूरा-सा प्यार,
हम दोनों करते हैं सोने का इकरार।
कॉफ़ी शॉप की शीशे पे शाम का रंग,
हमारी कहानी का था कुछ अलग ही ढंग।
सुबह की बस में झुकी एक खाली सीट,
कभी-कभी लगे तू आकर बैठेगी ठीक।
जेब में रखी मुड़ी-तुड़ी पुरानी तस्वीर,
मैं और तू — एक अधूरी तहरीर।
बस स्टैंड के शोर में तेरा नाम तैरे,
धूल भरा शहर भी अचानक प्यार करे।
नीयन लाइट के नीचे जमा हुआ शोर,
तू पास नहीं, फिर भी लगे बिल्कुल करीब और।
कॉफ़ी शॉप की शीशे पे शाम का रंग,
हमारी कहानी का था कुछ अलग ही ढंग।
इस माया के शहर में हम दो राहगीर,
मोहब्बत चलती है नियमों के उलट धीर।
हाथ न छूकर भी, सीना सीने को जाने,
आँखों की भाषा में लिखे अनकहे फसाने।
कॉफ़ी शॉप की शीशे पे शाम का रंग,
हमारी कहानी का था कुछ अलग ही ढंग।