[Intro]
सुबह की रोशनी में पंक्तियाँ उगतीं, जैसे धूप के बीज
मैं चल रहा हूँ शहर से नहीं, सिर्फ़ एक खेत की धड़कन में
[Verse 1]
गिटार मेरी सांस है, हाथों में रोशनी के तार
पीले फूलों के खेते से गुजरता, सपनों का नया अंदाज़
हर कदम में एक मीठा राग, हवा में अंबर-सा स्वतंत्रता
मैं कह रहा हूँ भीतर से: अब बनाऊँगा मैं कुछ खास, कुछ नया
[Chorus]
दिल कहे हाँ, पंक्तियाँ बहेंगी, जैसे नदियाँ खेतों से
मrudui बनایेंगी हर सुबह को, उजास से भर देंगी रातें
ख़्वाब नहीं, असलियत की रेखाएँ, जो उम्मीद के तार छूएँ
आज से शुरू, मैं हूँ तयार, नई रचना को चलो पिएँ
[Verse 2]
गिटार पर उंगलियाँ नाचें, धुन में उठे सूरज का रंग
फूलों की खुशबू में लिपटे शब्द, मैं लिख दूँगा उनका संग
यह ठंडी जमीन, यह गर्म रोशनी, सब कुछ साथ जोड़ दें
मैं नया गीत बनाऊँगा, जो हर दिल को नींद से जगा दे
[Chorus]
दिल कहे हाँ, पंक्तियाँ बहेंगी, जैसे नदियाँ खेतों से
मrudui बनایेंगी हर सुबह को, उजास से भर देंगी रातें
ख़्वाब नहीं, असलियत की रेखाएँ, जो उम्मीद के तार छूएँ
आज से शुरू, मैं हूँ तयार, नई रचना को चलो पिएँ
[Bridge]
स्टार नहीं, खेत की धड़कन ही मेरा मार्ग है
गिटार की हलचल में मिलती है मेरे चरणों की आवाज़
जो मिलने वाली रोशनी है, उसे मैं गीतों में बाँध दूँ
[Chorus]
दिल कहे हाँ, पंक्तियाँ बहेंगी, जैसे नदियाँ खेतों से
मrudui बनایेंगी हर सुबह को, उजास से भर देंगी रातें
ख़्वाब नहीं, असलियत की रेखाएँ, जो उम्मीद के तार छूएँ
आज से शुरू, मैं हूँ तयार, नई रचना को चलो पिएँ
[Outro]
फसल की घास में गूँजती धुन, पीले फूलों की राह में निशान
मैं चलता रहा, प्रेरणा के साथ, और लिख दूँगा एक नया अरमान