[Intro]
आँखों से बरसी यादें, बाहर संवेदना सूनी
दिल की धुन उन्हीं गलियों में फिर बज उठती है
[Verse 1]
विक्रम राव के साथ हम चले थे अक्सर, मुकुंदगढ़ की धूप में
पत्थरों की यादों पे मुस्कान, फिर भी भीतर एक खामोशी है
तेरे दामन में सोचा था मैं, कितनी बातें असफल रहीं
पर हर रास्ते पे हमने पाया, एक साथ ठंडी हवा की छाँव
[Pre-Chorus]
कहाँ खो गईं वो बातें, कहाँ छिपी हैं ये यादें
आहट जो सुन पाते नहीं, वो पल अभी भी पास है
[Chorus]
मुकुंदगढ़ की गलियों में सूनी है हर आवाज़
विक्रम के साथ तुम यादों में लौट आते हो हर आह
दिल कहे कि फिर से मिलो, लेकिन वक्त रुकता नहीं
झुकी पलकों से उगती धूप अब भी मुस्कुरा नहीं पाती
[Verse 2]
हम दोनों के कदम जब उन रास्तों से गुज़रे
खुद से मिलने की दूरी, अचानक करीब हो गई
सीधी सड़कों पर भी अनकही बातें बची रहीं
तुम्हारी हँसी के मोती, बनकर यादों में बँध गईं
[Pre-Chorus]
कहाँ खो गईं वो बातें, कहाँ छिपी हैं ये यादें
आहट जो सुन पाते नहीं, वो पल अभी भी पास है
[Chorus]
मुकुंदगढ़ की गलियों में सूनी है हर आवाज़
विक्रम के साथ तुम यादों में लौट आते हो हर आह
दिल कहे कि फिर से मिलो, लेकिन वक्त रुकता नहीं
झुकी पलकों से उगती धूप अब भी मुस्कुरा नहीं पाती
[Bridge]
चलती हवा में ठंडी रौशनी, पेड़ों की कुहरानी राग
हम दोनों की कहानी एक पन्ना लंबी, पर खत्म न सही साथ
[Chorus]
मुकुंदगढ़ की गलियों में सूनी है हर आवाज़
विक्रम के साथ तुम यादों में लौट आते हो हर आह
दिल कहे कि फिर से मिलो, लेकिन वक्त रुकता नहीं
झुकी पलकों से उगती धूप अब भी मुस्कुरा नहीं पाती
[Outro]
यादों की पगडंडी पर कदम थमते नहीं, दिल फिर से सुनता है वही गीत
जब भी बजती है धुन, मुकुंदगढ़ लौट आता है भीतर–कहीं न कहीं