[Intro]
शांत दीवारों के बीच एक कसक है
क्लॉक की टिक-टिक में एक नर्मी सी धड़कन
[Verse 1]
जेल की खामोशी पर सन्नाटा छाया, हल्की आवाज़ें गूंजतीं नहीं
Imran Khan पन्नों सी ठंडी चाल से बैठा, जूतों को पॉलिश कर रहा है
चेहरे पर सुकून, मुश्किलों के बीच सब्र की रेखा लिखी
[Chorus]
खबरें भी हैं रोक-सी गयीं, आवाज़ेँ परवान नहीं
पर वो जसबत लिए बैठा, वक्त से थोड़ा पहले नमाज़ की घड़ी है
मुलाकात की घड़ी है, दिलों में धड़कन के साथ
[Verse 2]
दरवाज़े पर सिपाही की आँखें, हर कदम पर तर्ज़े-हवा सा
अचानक खुला दरवाजा, फरिश्ते नहीं, Fazal ur Rehman अंदर आये
मोहब्बत से नहीं, ठहराव से बात हो रही है
[Chorus]
खबरें भी हैं रोक-सी गयीं, आवाज़ेँ परवान नहीं
पर वो जसबत लिए बैठा, वक्त से थोड़ा पहले नमाज़ की घड़ी है
मुलाकात की घड़ी है, दिलों में धड़कन के साथ
[Bridge]
Imran Khan ने ब्रश नीचे रखा, समय को देखा
कलाई पर निगाह, जैसे कब की तिथि तय हो
चाचा, नमाज़ का वक्त हो गया, नमाज़ की पहली रेखा
[Verse 3]
मौलाना थोड़ा हैरान, पर सवालों का दरिया थम गया
वो वुज़ू की तैयारी में खामोश, चाह नज़रें उठे
दरअसल बातें नहीं, नीयतें साफ़, हवा में एक उम्मीद जीवित
[Chorus]
खबरें भी हैं रोक-सी गयीं, आवाज़ेँ परवान नहीं
पर वो जसबत लिए बैठा, वक्त से थोड़ा पहले नमाज़ की घड़ी है
मुलाकात की घड़ी है, दिलों में धड़कन के साथ
[Outro]
धीमी रोशनी से दीवारें सुनती रहीं, नमाज़ की आवाज गूंजती है
Imran Khan के हाथों की बोझ हल्की, पर नमाज़ शुरू
बस उसी पल नोटबुक नहीं, वक्त समझ गया