[Intro]
शहर-गाँव की गलियां, गूँजती धुनें साथ लिए
दिल की धड़कन में गाँव की मिट्टी, पसीने की रोशनी थी
[Verse 1]
सर पे दुपट्टा, दायरे का पसीना, पर हौंसला अडिग
मैं आवाज हूँ यहाँ, भीड़ की सांसों से जुड़ा सिंफनीग
म_microphone_ हाथों में, केबल सा वादा है रहा साफ़
मंच की रौशनी में आज मेरे कदमों की धड़कन है आवाज़ साफ़
[Pre-Chorus]
जड़ें गहरीं, सपने ऊँचे, मैं जो भी बोलूँ, डरता नहीं
परंपराओं के पंख मेरे, आधुनिक उजालों के साथ खुलते हैं
[Chorus]
मैं हूँ युवा, जो जड़ से उगे नये गीत गाता
अपने इतिहास को खोल-खोल कर, भविष्य को गले लगाता
समुदाय की मुस्कान में हूँ मैं अपना चेहरा देखता
यह मंच, यह प्रकाश, यह मेरा आत्म-विश्वास, दिल से बोलता
[Verse 2]
गाव की गलियों की रौनक, शहर की भीड़ की धड़कन साथ
मैं बाँध रहा हूं दोनों दुनियाओं को, एक साथ उजागर कर दिन-रात
परंपराओं की चौखट पर आधुनिकता के रंग लगाते
हर एक शब्द में गर्व है, हर एक नज़र में विश्वास लिखते
[Pre-Chorus]
जड़ें गहरीं, सपने ऊँचे, मैं जो भी बोलूँ, डरता नहीं
परंपराओं के पंख मेरे, आधुनिक उजालों के साथ खुलते हैं
[Chorus]
मैं हूँ युवा, जो जड़ से उगे नये गीत गाता
अपने इतिहास को खोल-खोल कर, भविष्य को गले लगाता
समुदाय की मुस्कान में हूँ मैं अपना चेहरा देखता
यह मंच, यह प्रकाश, यह मेरा आत्म-विश्वास, दिल से बोलता
[Bridge]
भीड़ की रोशनी में मैं एक कहानी बनकर उठता हूँ
हाथों में केबल, होठों पर एक नया सपना जड़ता हूँ
[Chorus]
मैं हूँ युवा, जो जड़ से उगे नये गीत गाता
अपने इतिहास को खोल-खोल कर, भविष्य को गले लगाता
समुदाय की मुस्कान में हूँ मैं अपना चेहरा देखता
यह मंच, यह प्रकाश, यह मेरा आत्म-विश्वास, दिल से बोलता
[Outro]
शहर-गाँव का संगम है मेरी धुन, मैं यहीं ठहरता हूँ
गर्व से सिर ऊँचा, परंपराओं के साथ नया जग बनाता हूँ