[Verse 1]
बाहर से दिखे नहीं अंत:कथा, केवल भाग बनते जाएँ कुछ-कुछ apart
धीरे-धीरे समायोजन, हर टुकड़ा ज्यों ड्रॉअर में टिकेहार
आकृति के भीतर शासन, हर ऊर्जा सटल, शुद्ध-संयमित स्वर
देखो: एक-एक कहे बिना बंदी, अंतिम रूप में पैक-इन आकारणीय
[Chorus]
बस भाग जुड़ते हैं, शांति से, बिना हलचल के
हर ठिकाने पर टिके, सही जगहों से सजते हैं
गति नाजुक, पर सही, क्रियान्वयन पक्का है
हाथ, कैमरा, रोशनी—सब स्थिर, सिर्फ़ भागों का है काम
[Verse 2]
ताक़ीद निस्सीम, क्रमिक सम्मिश्रण, स्पर्श नहीं, फिर भी असरदार
यथार्थिक इलेक्ट्रॉनिक संतुलन, हर कण में क्रम संदर्शक
आख़िर में एक साथ नहीं, एक-एक करके समेटे जाएँ
लोक-आकृति का रहस्य खुलता, जब सब जगह-स्थान मिलते जाएँ
[Chorus]
बस भाग जुड़ते हैं, शांति से, बिना हलचल के
हर ठिकाने पर टिके, सही जगहों से सजते हैं
गति नाजुक, पर सही, क्रियान्वयन पक्का है
हाथ, कैमरा, रोशनी—सब स्थिर, सिर्फ़ भागों का है काम
[Bridge]
शॉन्डिंग, पन्ने-सा पक्का, इंजीनियरिंग का सादा संगीत
साफ़, प्रीसाइज़, कॉन्टीन्यूअसली क़दम—जैसे कि कोई रिकॉर्डिंग
[Chorus]
बस भाग जुड़ते हैं, शांति से, बिना हलचल के
हर ठिकाने पर टिके, सही जगहों से सजते हैं
गति नाजुक, पर सही, क्रियान्वयन पक्का है
हाथ, कैमरा, रोशनी—सब स्थिर, सिर्फ़ भागों का है काम
[Outro]
एक बार पूर्ण, फिर भी न बदले दृश्य, काम पूरा—बस यही है संकेत