[Intro]
छोटी सी बस्ती, धुन में धुन, हाथ में टन्ना-टन्ना टन
दोस्तों के बीच एक कहानी की धार, एक आवाज़ निकलती है काम की ठान
[Verse 1]
अरशद कहे, सुनो साथियों, यहाँ मजदूर-समुदाय है सजग
मज़दूर गाँव से आया कोई बताए, किसे चाहिए कर-गर की बनावट
कौन परिचारक, कौन कारीगर, कौन-सा हाथ जो दे सकते साथ
ताक़त हो तो झुलसी रातों में भी खुले दरवाज़े मिलते आज
[Verse 2]
एक मजदूर कहता—मैं हूँ दामन-सा साफ, मेहनत ईमान की धारा
हम सब मिलकर करेंगे काम, हर कठिन को आसान बनाना हमारा नियम
कौन-सी नौकरी चाहिए, कहाँ पहुँचे संपर्क—जोड़े हम सब साथी का हाथ
हाथ में फ़ॉर्म, पन्नों में तारीखें, और वेतन की स्पष्ट राह
[Chorus]
आओ करें बात साफ़-सी, देखो कैसे करें शुरुआत
संयम से, सहयोग से, मिलेगा काम और अपनी पहचान
अगर तुम कर-गर बनना चाहो, बताओ यहाँ संपर्क मुँह-ज़ुबान
हमारा समुदाय, तुम्हारा भरोसा, साथ हैं हर कड़वे दिन के लिए
[Verse 3]
विकल्प खुलते हैं जैसे दरवाज़े—मज़दूर चोपड़ियों की छोटी कहानियाँ
कहता एक साथी: “हां, वेतन बकायदा, समय पर दे देंगे लोग साथ”
हम सुझावों की पाती बाँट दें, दस्तावेज़, पोस्टर, नोटिस बोर्ड
क्लास-रूम नहीं, पर काम-के-नज़दीक एक साझा मंच
[Chorus]
आओ करें बात साफ़-सी, देखो कैसे करें शुरुआत
संयम से, सहयोग से, मिलेगा काम और अपनी पहचान
अगर तुम कर-गर बनना चाहो, बताओ यहाँ संपर्क मुँह-ज़ुबान
हमारा समुदाय, तुम्हारा भरोसा, साथ हैं हर कड़वे दिन के लिए
[Bridge]
संघर्ष के पन्नों में एक उम्मीद लिखा है—“हम साथ हैं”
कर-गर की तलाश नहीं, डर नहीं, बना लें नया रास्ता साथ मिलकर
काम के भाई-बहनों से सीखें, सम्मान के साथ मिल्कियत पाएं
[Chorus]
आओ करें बात साफ़-सी, देखो कैसे करें शुरुआत
संयम से, सहयोग से, मिलेगा काम और अपनी पहचान
अगर तुम कर-गर बनना चाहो, बताओ यहाँ संपर्क मुँह-ज़ुबान
हमारा समुदाय, तुम्हारा भरोसा, साथ हैं हर कड़वे दिन के लिए
[Outro]
सीमान्त की इस बस्ती से, जुड़ें हमारे हाथों की क़श्ती
कर-गर और साथी—दोनों का मक़सद एक, खुले आसमान की तरफ़ अग्रसर
काम, उम्मीद, और दोस्ती के साथ, घर लौटेंगे हम सब साथ साथ