जय जय वीर हनुमान,
भक्तों के तुम प्राण,
राम नाम में लीन सदा,
अंजनि के तुम लाल।
जय जय वीर हनुमान,
संकट हरने वाले,
दीन दुखी की पीड़ा हर,
सबके रखवाले।
अंतरा 1
बाल रूप में सूर्य निगले,
तीनों लोक हिलाए,
देव दनुज सब डर के बोले,
पवनसुत कहलाए।
लंकापुरी को राख किया,
सीता माँ का मान,
राम दूत बन करके तुमने,
कर दिया कल्याण।
कोरस
जय जय वीर हनुमान,
भक्तों के तुम प्राण…
अंतरा 2
राम नाम की महिमा गाकर,
पर्वत को उठाया,
संजीवनी बूटी लाकर,
लखन को बचाया।
बुद्धि बल विद्या के सागर,
ज्ञान का भंडार,
जो भी शरण में आए तेरी,
हो जाए उद्धार।
कोरस
जय जय वीर हनुमान,
संकट हरने वाले…
अंतरा 3
जहाँ सच्चा मन से सुमिरन,
वहाँ तू आ जाए,
भूत प्रेत और भय के साए,
पास न फटक पाए।
तेरे नाम की गूंज से ही,
मिट जाए अज्ञान,
भक्ति शक्ति प्रेम का रूप,
तू ही हनुमान।
अंतरा 4
मंगल मूर्ति मारुति नंदन,
करुणा के अवतार,
तेरे चरणों में झुकता है,
ये सारा संसार।
जीवन नैया पार लगा दे,
दे के भक्ति दान,
तेरे भरोसे छोड़ दिया,
हमने ये जहान।
अंतिम कोरस (दोहरे भाव के साथ)
जय जय वीर हनुमान,
राम भक्त महान,
कलियुग में जो नाम जपे,
उसका हो कल्याण।
जय जय वीर हनुमान,
अंजनि के लाल,
तेरी महिमा अपरंपार,
तू ही पालनहार।