सुनो चंदा, ज़रा ठहरो,
आज तुमसे बात है,
रात ने ओढ़ी है चादर,
चाँदनी की सौगात है।
सुनो चंदा, तुमसे पूछूँ,
कौन इतना ख़ास है,
जिसकी यादों में ये दिल भी,
आज फिर बेक़रार है।
तारों से कह दो न तुम,
धीरे-धीरे झिलमिलाएँ,
मेरी आँखों के ख़्वाबों को,
आज वो भी गुनगुनाएँ।
सुनो चंदा, ज़रा ठहरो,
एक पैग़ाम लेके जाना,
जिसके बिना ये रात अधूरी,
उससे मेरा हाल बताना।
कहना उससे… चुपके-चुपके,
दिल उसे ही चाहता है,
दूर रहकर भी वो जाने,
कोई उसे बहुत याद करता है।