[Intro]
किताब के पन्नों में धुआँ-सा उड़ता है उजाला
पुरानी डायरी की काग़ज़ पर तिनकों-सी यादें पलटती
[Verse 1]
तुम्हारे खत की खुशबू अब भी वहाँ है, पर पन्ने खो गए हैं
हर अक्षर में बीती गर्मी, हर दूरी में ताज़ा कमज़ोरी
मैं उन्हीं काग़ज़ों से पूछती हूँ: कहाँ है तुम, कहाँ डूबे हैं पल
जो शुरू हुआ था एक धड़कन से, अब एक खाली जगह बन गया है
[Chorus]
ये पन्ने, ये यादें, ये दिल्ली-सी दूरी
मुझसे कहतीं—कहाँ गया वो तुम्हारा सुरूर
खोयांपन की धुंध में तुम क्या सचमुच पास थे
या सिर्फ वही ख्वाब थे जो सेज पर उठे थे
[Verse 2]
एक पत्र अब किसी और का है, पर मैं उसे तुम्हीं से पहचान लेती हूँ
कोई नया नाम, पर वही पंक्तियाँ, वही रंगीन लहज़े
गर्माहट के बिना भी यादें गर्म हैं, जैसे चाय की पत्ती in पानी
मैं पढ़ती हूँ, और लौट आती हूँ तुम्हारी आबो-हवा के पास
[Chorus]
ये पन्ने, ये यादें, ये दूरी अद्भुत पुरानी
मुझसे पूछतीं—क्या तुम अभी भी वही मुस्कान हो
जो कभी मेरे करीब थी, जो अब भी हवा में बसा है
तुम्हारी आवाज़ कहाँ गई है, कौन सा जवाब खो गया है
[Bridge]
अगर मिल जाए वह खत, फिर से लिख दूँ मैं एक नया पन्ना
तुम्हारे नाम के साथ तुम्हारी दूरी भी हल्की हो जाए
[Chorus]
ये पन्ने, ये यादें, ये दूरी फिर भी करीब लगती है
मगर मैं जानती हूँ, तुम अब बाहर हो किसी और कहानी के
जहाँ प्यार का अँधेरा है, वहाँ भी रोशनी की एक किरण है
[Outro]
फिर भी ये डायरी मुझे सिखाती है कि प्रेम कभी नहीं मरता
वह बस पलटती है, पुरानी ध्वनि से नई ध्वनि तक पहुँचती