[Intro]
हवाओं से पूछे यार, कहाँ जा रहा तू कभी-भी
सुरतें मिटती हैं धूप-सी, जब याद तेरी जगे रातों में
[Verse 1]
बलमुआ के घाट पर बैठे हम, यादों की नदी बहती जाए
भेड़िये-सी चिंता छोड़, तू ही शब्द-सीप की लहर बन जा
लगा जैसे मन का पेड़ मरुभूमि में हरा-भरा हो जाए
हर हलचल में तू ही आवाज, हर दहलीज पर तेरी तस्वीर हो समा जाए
[Chorus]
केहू नहीं हमारे बीच से, बस एक आवाज़ पर दिल डूबे
मिलन की राह में धूल-सी लगती दूरी, फिर भी आँखें खोले-खोले
दिल कहे: लौट आ जा, बलमुआ, इस बहरे शहर की चुप्पी तोड़ दे
मौन कहे: मिलन की घड़ी कब आएगी, ये इंतज़ार कब खत्म हो दे
[Verse 2]
रिश्तों के बंधन किताब-सी गहरी, पर पन्ने पलटते-पीछे लौटे
तू बन जा धुंधली रोशनी मेरी, जहाँ मैं खुद को असल में पाऊँ
भीतर की आवाज़ कहे, छोड़ दे ये दूरी, चल मिलकर घाटों पर तिरता छोड़ा जाए
सीने की चिराग़ी में तड़प वही, जो तुझ पे अटकी रही हर बात में समाई जाए
[Pre-Chorus]
कभी तो ये राहें खुलेंगी, मिलन की हवा चलेगी साथ
तुझ बिन सूनी लगती है ज़िंदगी, तू जो आए मेरा साथ
[Chorus]
केहू नहीं हमारे बीच से, बस एक आवाज़ पर दिल डूबे
मिलन की राह में धूल-सी लगती दूरी, फिर भी आँखें खोले-खोले
दिल कहे: लौट आ जा, बलमुआ, इस बहरे शहर की चुप्पी तोड़ दे
मौन कहे: मिलन की घड़ी कब आएगी, ये इंतज़ार कब खत्म हो दे
[Bridge]
तेरे नाम की चाबी खोई थी मैंने, फिर भी दिल रौशन करे
तेरी हँसी की झील में डूबकर, मैं खुद को फिर से पाऊँ, पर पाए
[Chorus]
केहू नहीं हमारे बीच से, बस एक आवाज़ पर दिल डूबे
मिलन की राह में धूल-सी लगती दूरी, फिर भी आँखें खोले-खोले
दिल कहे: लौट आ जा, बलमुआ, इस बहरे शहर की चुप्पी तोड़ दे
मौन कहे: मिलन की घड़ी कब आएगी, ये इंतज़ार कब खत्म हो दे
[Outro]
जब तू नज़दीक हो, हल्की धुन बन जाए हवा की
तब शब्दों के बाँचने से पहले, दिल अपनी भाषा बोल दे जीना