[Intro]
धूप की धुन, खेतों की उम्मीद。
[Verse]
रामू कहते: आज खेत जोतेंगे, बीज कम नहीं,
गौरी कहे: मैं दूँ दूध, तुम हल चलाओ सही।
[Chorus]
हम साथ हैं, मेहनत से फसल उगती है,
गौरी-बीरू-रामू, घर लौटे खुशियाँ लेकर।
[Bridge]
दोस्ती में राह आसान है, मेहनत पहले आती है।
[Outro]
खेतों में नई रोशनी, भूखे नहीं कोई。