[Verse 1]
सोया था जो ज्वालामुखी, अब वो जाग उठा है,
साँसों में जो दबा था धुआँ, अब आग उठा है।
ये दुनिया कहती है कि तुम चुपचाप चलो,
पर मेरी रगों में तो बगावत का राग उठा है!
[Chorus]
हम रुकने वाले नहीं, हम झुकने वाले नहीं,
लोहे की ज़ंजीरों में अब हम बिकने वाले नहीं!
शोर हमारा ही गूँजेगा हर एक दीवार पर,
हम रॉक की वो लहर हैं, जो थमने वाली नहीं!
[Verse 2]
भीड़ का हिस्सा बनना मेरी फितरत में नहीं,
झूठी वाह-वाही की मुझे कोई हसरत में नहीं।
गिटार के तारों पर जब मेरी उँगलियाँ चलती हैं,
तब कायनात झुकती है, पर मैं किसी की गिरफ्त में नहीं!
[Bridge]
(तेज़ गिटार सोलो की कल्पना करें...)
टूटे हुए सपनो को जोड़कर हथियार बनाया है,
खुद को तपा कर मैंने ये किरदार बनाया है!
अंधेरों से कह दो, अब रौशनी आने वाली है,
मेरी चीख ही अब नया संसार लाने वाली है!
[Chorus]
हम रुकने वाले नहीं, हम झुकने वाले नहीं,
लोहे की ज़ंजीरों में अब हम बिकने वाले नहीं!
शोर हमारा ही गूँजेगा हर एक दीवार पर,
हम रॉक की वो लहर हैं, जो थमने वाली नहीं!
[Outro]
गूँजने दो...
जलने दो...
ये आग... ये राग...
यही है मेरा रॉक!