पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरत रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप॥
बोलिए संकट मोचन हनुमान की — जय!
[मुखड़ा]
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु।
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[अंतरा 1]
अंजनी पुत्र केसरी नंदन,
तुम जग-जग के काटत बंधन।
तुमरे हृदय बसे रघुनंदन,
भक्ति तुम्हारी जग में वंदन।
तुमरे हृदय में, हाँ तुमरे हृदय में,
बैठे सीता-राम।
हमारे संकट काटो प्रभु,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[मुखड़ा (दोहराव)]
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[अंतरा 2]
तुमको जानत है जग सारा,
संकट मोचन नाम तुम्हारा।
आके संकट हरो हमारे,
दास पुकारे द्वार तिहारे।
तुमको संकट मोचन,
हाँ तुमको संकट मोचन,
मानत है भगवान।
हमारे संकट काटो प्रभु,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[मुखड़ा (दोहराव)]
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[अंतरा 3]
बड़े-बड़े दानव संहारे,
रामचंद्र के काज सँवारे।
लक्ष्मण जी के प्राण बचाए,
संजीवनी गिरि ले आए।
लक्ष्मण जी के, हाँ लक्ष्मण जी के,
बचालय तुमने प्राण।
हमारे संकट काटो प्रभु,
हमारे संकट काटो प्रभु॥
[समापन]
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु।
ओ मोरे संकट के कटैया, हनुमान,
हमारे संकट काटो प्रभु॥